एक प्रेरणादायक शिक्षक की कहानी: कामिल सरवर

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         एक प्रेरणादायक शिक्षक की कहानी: कामिल सरवर
जिला रोहतास के डेहरी (Dehri) प्रखंड अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नारायण बिघा में एक ऐसा नाम उभरकर सामने आता है, जो केवल पढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि भविष्य गढ़ने का मिशन लेकर चल रहा है—कामिल सरवर।
               राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारायण बिघा 
जिला रोहतास के डेहरी प्रखंड अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नारायण बिघा में कार्यरत शिक्षक कामिल सरवर आज के समय में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहे हैं। वे कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को जनरल विषय के साथ-साथ अंग्रेज़ी पढ़ाते हैं, लेकिन उनकी पहचान केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो समाज के वंचित और ग्रामीण परिवेश से आते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर संसाधनों की कमी और जागरूकता का अभाव बच्चों की शिक्षा में बाधा बनता है, लेकिन ऐसे माहौल में कामिल सरवर जैसे शिक्षक शिक्षा को एक नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। वे पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि TLM (Teaching Learning Material) और Project Based Learning जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग कर बच्चों को व्यावहारिक और रोचक तरीके से सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके द्वारा तैयार की गई शिक्षण सामग्री और गतिविधियाँ बच्चों में जिज्ञासा, समझ और आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं, जिससे बच्चे सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेने लगते हैं।

कामिल सरवर की यह सेवा भावना उन्हें उनकी माता कहकशां अंजुम और पिता सरवर अंसारी से विरासत में मिली है, पिता एक सम्मानित हेडमास्टर रहे हैं और मां कहकशां अंजुम विशिष्ट शिक्षिका हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में न जाने कितने बच्चों को शिक्षित कर उन्हें बेहतर भविष्य की राह दिखाई, और आज उनके पढ़ाए हुए कई छात्र समाज में ऊँचे ओहदों पर कार्यरत हैं। यही प्रेरणा कामिल सरवर को भी अपने कार्य के प्रति समर्पित और जिम्मेदार बनाती है।

कामिल सरवर का मानना है कि शिक्षा केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सबसे मजबूत आधार है। वे बच्चों को न केवल विषयों की समझ देते हैं, बल्कि उन्हें अनुशासन, नैतिकता और बड़े सपने देखने की प्रेरणा भी देते हैं। उनकी कक्षा में बच्चे डर के माहौल में नहीं, बल्कि उत्साह, आत्मविश्वास और जिज्ञासा के साथ सीखते हैं।

आज के समय में, जब शिक्षा कई बार केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, ऐसे में कामिल सरवर जैसे शिक्षक यह साबित करते हैं कि सच्ची निष्ठा, समर्पण और सही शिक्षण पद्धति से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। वे शिक्षा के माध्यम से न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की नींव मजबूत कर रहे हैं। उनके प्रयास यह दर्शाते हैं कि यदि एक शिक्षक ठान ले, तो वह गांव के हर बच्चे के जीवन में उजाला ला 
सकता है।
Report story : Journalist Rana Shaidai 

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