पटना की हवा कितना नुकसान पहुंचा सकती है ? पढ़िए पटना का AQI पर यह ख़बर ?
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| पटना का AQI |
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| पटना का AQI 2020 से 2026 का डेटा |
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| Journalist Rana Shaidai |
कारण और बचाव ।
बीते दिनों भारत की राजधानी दिल्ली में एक-यूआई को लेकर खूब चर्चा का विषय बना रहा । तमाम अखबारों,सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया दिल्ली की अबू हवा पर खूब सुर्खिया बटोरती रही लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला । अब यह एक-यूआई(AQI) यानी( एयर क्वालिटी इंडेक्स ) बिहार में भी चर्चा में धीरे-धीरे बनता दिख रहा है । आपको बता दें की एक यूआई का मतलब होता है एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी आपकी हवा कितनी शुद्ध है आप जो सांस ले रहे हैं उसमें कितने हेवी मेटल के पार्टिकल्स या कितनी नुकसान पहुंचाने वाले कार्बन युक्त छोटे-छोटे कड़ हैं जो आपको बीमार और कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। आधुनिक दौर में जिस तरीके से चारों तरफ अपने आप को तरक्की के पायदान पर तेजी से स्थापित करने की दौड़ और होड़ मची है । जिसके कारण मानव अपने ही जीवन को खतरे में डाल रहे हैं । मसलन फैक्ट्री में ताबड़तोड़ उत्पादन के चलते अंत्य अधिक जलवान पदार्थ का इस्तेमाल करना, कई ऐसे वाहनों का रोड पर चलना जो भारी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन कर रहे हैं , जिसमें फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं कार और ऑटो रिक्शा से निकलने वाले धुएं ऐसी (एयरकंडीशन) से उत्पन्न होने वाली गर्म हवाएं और कई तरह के ईंधन और ज्वलन पदार्थ का जलना जिससे कार्बन का उत्सर्जन भारी मात्रा में हो रहा है । और कार्बन सोखने वाले जंगल तेजी से काटे जा रहे हैं। और यही कारण है की बड़े शहरों से लेकर गांव तक की हवाएं अब शुद्ध नहीं है। एक यूआई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार जीरो से 50 तक गुड अच्छा 50 से 100 तक मॉडरेट 100 से 150 तक पुअर और 150 से 200 तक अनहेल्दी माना गया है । लेकिन पटना का एक यूआई एयर क्वालिटी इंडेक्स 258 के करीब पहुंच गया है जिसे सीवियर स्टेज माना जाता है। यानी खतरे की घंटी । एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब होने के कारण कई तरीके की बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं जैसे जिसमें सबसे प्रचलित है रेस्पिरेटरी सिस्टम का खराब होना और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों के होने का खतरा।
जानिए कैसे करें बचाव ?
घर से बाहर निकलते ही अपने चेहरे को स्कार्फ या मास्क से ढके ऐसी गाड़ियां या मोटरसाइकिल का इस्तेमाल न करें जिससे भारी मात्रा में काले धुएं और उसके द्वारा कार्बन का उत्सर्जन अंत्य अधिक होता हो। ऐसे वाहनों पर ना चढ़े ना ही इसका इस्तेमाल करें। सरकार को रोड साइड फव्वारे लगाकर पानी का छिड़काव करना चाहिए जिससे हवा में उड़ रहे हेवी मेटल पानी के संपर्क में आकर जमीन में बैठ जाएंगे लेकिन यह परमानेंट उपाय नहीं है। हमें फैक्ट्री ऐसी (AC) और कई कार्य जैसे कि पराली का जालना बंद करना होगा और भारी मात्रा में ऐसे पौधे अपने घरों की छतों पर बगीचों में और रोड साइड के इलाकों में लगाने होंगे जो कार्बन को तेजी से सोखने का कार्य करें । साथ ही सरकार को ऐसे वाहन या ऐसे कल कारखाने जो भारी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन कर रहे हो उन पर रोक लगानी होगी। सभी लोगों को मोटरसाइकिल की जगह साइकिल का इस्तेमाल करना होगा कार की जगह ट्रेन या बस का इस्तेमाल करना होगा तभी हम धीरे-धीरे इस समस्या से उबर पाएंगे नहीं तो आने वाले समय में यह बहुत ही परेशानी का और चिंता का विषय बन सकता है।
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